a समाजशास्त्र विभाग, महात्मा गाँधी, महाविद्यालय, सुंदरपुर, दरभंगा
Received: 09-07-2023, Revised: 02-08-2023, Accepted: 19-08-2023, Available online: 30-11-2023
महिला आन्दोलन को आधुनिक आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण सामाजिक आन्दोलन के रूप में देखा जाता है l इसका उद्येश्य उन संस्थागत प्रबंधनों, मूल्यों, रीती – रिवाजों और समाज की आस्थाओं में परिवर्तन लाना है जिन्होंने वर्षों से महिलाओं को पराधीन कर रखा था l भारत में महिलाओं की परिस्थिति विभिन्न कालों और विभिन्न वर्गों, धर्म और जातीय समूहों में अलग – अलग रही है l उन्नीसवीं शताब्दी में महिलाओं से संबंधित बहुत सी सामाजिक बुराइयाँ जैसे सती प्रथा (विधवा का अपने पति के साथ चिता में जीवित जल जाना), बाल विवाह, विधवा पुनविर्वाह पर निषेध, बहु विवाह इत्यादि फैली हुई थी l
Keywords: विधवा, निषेध, रीती – रिवाजों, महिला आन्दोलन
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महतो , दीपक (2023). महिला आन्दोलन और नारी सशक्तिकरण. International Journal of Basic & Applied Science Research (IJBASR), 10 (3), 16-19