a न्यू अभंडा, कृष्णा नगर, लहेरियासराय, दरभंगा
Received: 10-05-2025, Revised: 19-06-2025, Accepted: 24-07-2025, Available online: 30-09-2025
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण ग्रामीण विकास योजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवासहीन एवं कच्चे मकानों में रहने वाले निर्धन परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। यह योजना वर्ष 2016 में प्रारम्भ की गई और इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण गरीबों को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा तथा आधारभूत सुविधाओं से युक्त आवास उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत आवास निर्माण के साथ स्वच्छ शौचालय, स्वच्छ ईंधन पेयजल एवं विद्युत जैसी सुविधाओं का समावेश भी किया गया है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का ग्रामीण निर्धन परिवारों के जीवन स्तर पर प्रभाव का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है। अध्ययन में ग्रामीण परिवारों की आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य एवं मनोवैज्ञानिक स्थितियों में हुए परिवर्तन का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन हेतु प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आंकड़ों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक आंकड़े 100 लाभार्थी परिवारों से साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से संकलित किए गए हैं। द्वितीयक आंकड़े सरकारी रिपोर्टों, शोध-पत्रों, पुस्तकों तथा इंटरनेट स्रोतों से प्राप्त किए गए हैं। अध्ययन से ज्ञात हुआ कि योजना के अंतर्गत पक्का आवास प्राप्त होने से ग्रामीण निर्धन परिवारों के सामाजिक सम्मान सुरक्षा, स्वच्छता स्वास्थ्य तथा बच्चों की शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन आया है। महिलाओं की सामाजिक भागीदारी एवं निर्णय क्षमता में वृद्धि देखी गई। हालांकि, योजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार, निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमत, किस्तों के विलंब तथा तकनीकी समस्याएँ प्रमुख बाधाएँ हैं। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना ग्रामीण जीवन स्तर सुधारने की दिशा में एक प्रभावी योजना सिद्ध हुई है किन्तु इसकी सफलता के लिए पारदर्शिता समयबद्ध भुगतान तथा स्थानीय स्तर पर प्रभावी निगरानी आवश्यक है।
Keywords: प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना; ग्रामीण निर्धनता; जीवन स्तर; समाजशास्त्रीय अध्ययन
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, शक्ति शंकर कुमार (2025). प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का ग्रामीण निर्धन परिवारों के जीवन स्तर पर प्रभाव: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन. International Journal of Basic & Applied Science Research (IJBASR), 12 (3), 41-47